jharkhand-पारसनाथ की तलहटी में बसे 32 आदिवासी परिवारों के लिए MLA Jairam Mahto  ने उठाया बड़ा कदम? वादे के अनुसार इसकी शुरुआत भी हो गई
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jharkhand-पारसनाथ की तलहटी में बसे 32 आदिवासी परिवारों के लिए MLA Jairam Mahto ने उठाया बड़ा कदम? वादे के अनुसार इसकी शुरुआत भी हो गई

jharkhand- गिरिडीह- पारसनाथ की तलहटी में बसे इस गांव तक अब पहुंचेगी पक्की सड़क? 32 आदिवासी परिवारों के लिए MLA Jairam Mahto ने उठाया बड़ा कदम? वादे के अनुसार इसकी शुरुआत भी हो गई

डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो पहुंचे दलान चलकरी गांव और मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद अब (दलान चलकरी) गांव में बदलाव की शुरुआत होगी। जल्द ही इस गांव तक पक्की सड़क पहुंचेगी और पेयजल की भी स्थायी व्यवस्था होगी। अपने वादे के अनुसार 32 आदिवासी परिवारों को एक महीने का राशन उपलब्ध कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ
गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत छछन्दो पंचायत का दलान चलकरी गांव आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी पक्की सड़क से वंचित है। पारसनाथ की तलहटी में बसे इस जंगल क्षेत्र में अधिकांश आबादी आदिवासी परिवारों की है।

बरसात के मौसम में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों का बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जिससे खाने-पीने जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कुछ दिन पहले आदिवासी दंपति की हत्या के बाद जब मैं इस गांव पहुंचा था, तब मैंने ग्रामीणों से वादा किया था कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करूंगा।
आज मैंने अपने उसी वादे को निभाते हुए 32 आदिवासी परिवारों के लिए एक महीने के राशन की व्यवस्था कराई, ताकि बरसात के इस कठिन समय में किसी भी परिवार को भोजन की परेशानी न हो।
साथ ही गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने एवं पक्की सड़क निर्माण के लिए मैंने अनुशंसा कर दी है। इस संबंध में गिरिडीह के उपायुक्त से भी विस्तार से बात हुई है। पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान के लिए गांव में (सोलर पानी टंकी) लगाने का भी आग्रह किया है।

ग्रामीणों ने बताया कि आज तक कोई सांसद या विधायक इस गांव तक नहीं पहुंचा था। पारसनाथ की तलहटी में स्थित यह दुर्गम और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से काफी दूर रहा है।
जब यहां सीआरपीएफ कैंप की स्थापना की जा रही थी, तब भी काफी विरोध और तनाव का माहौल बना था। इन परिस्थितियों का असर वर्षों तक इस क्षेत्र के विकास पर पड़ा, जिसके कारण सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं गांव तक नहीं पहुंच सकीं थी

मैंने क्षेत्र की सामाजिक संस्थाओं से भी अपील की थी कि वे गांव पहुंचकर आदिवासी परिवारों की हरसंभव सहायता करें। यह प्रसन्नता की बात है कि कई सामाजिक संस्थाओं ने आगे बढ़कर ग्रामीणों की मदद भी की।
हमारा संकल्प है कि इस दूरस्थ आदिवासी गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए यहां के प्रत्येक परिवार को सम्मानजनक जीवन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, संघर्ष जारी है